MCD by-election: 12 सीटों की लड़ाई तय करेगी दिल्ली की राजनीति का नया गणित, देखें बड़ा मुकाबला

MCD by-election: दिल्ली नगर निगम की बारह वार्ड सीटों के उपचुनाव की तैयारियां अब पूरी हो चुकी हैं। प्रचार अभियान समाप्त हो चुका है और सभी की नजरें तीस नवंबर को होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं। यह उपचुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए पहला बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव में पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की थी। अब यह देखा जाएगा कि राजधानी की नगर राजनीति में पार्टी अपने प्रभाव को कितना मजबूत रख पाती है।
शालीमार बाग बी सीट पर प्रतिष्ठा की लड़ाई
इन उपचुनावों में शालीमार बाग बी सीट खास चर्चा में है। यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है क्योंकि यहां से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहले पार्षद रह चुकी हैं और बाद में इसी क्षेत्र से विधायक बनीं। ऐसे में पार्टी यहां किसी भी कीमत पर हार स्वीकार नहीं करना चाहती। दूसरी ओर द्वारका बी सीट भी महत्वपूर्ण है जो भाजपा की कमलजीत सेहरावत के लोकसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी।

निगम सदन की मौजूदा स्थिति
दिल्ली नगर निगम में कुल दो सौ पचास सदस्य होते हैं जिनमें से वर्तमान में भाजपा के एक सौ सोलह पार्षद हैं। आप के पास निन्यानवे और इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के पंद्रह पार्षद हैं। कांग्रेस के आठ सदस्य सदन में मौजूद हैं। इस बदली हुई तस्वीर का कारण पिछले दो वर्षों में हुए लगातार दलबदल हैं क्योंकि यहां दलबदल कानून लागू नहीं होता।
दो हजार बाईस के चुनाव की पृष्ठभूमि
साल दो हजार बाईस के नगर निगम चुनावों में आम आदमी पार्टी ने एक सौ चौंतीस सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। भाजपा ने उस समय एक सौ चार सीटों पर जीत दर्ज की और कांग्रेस ने नौ सीटें अपने नाम की थीं। तीन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए थे। तब से लेकर अब तक पार्षदों ने कई बार दल बदले और मौजूदा समीकरण पूरी तरह बदल गए।
उपचुनाव से बदल सकते हैं हालात
उपचुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि दिल्ली की नगर राजनीति में किस पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा। भाजपा जहां अपने मजबूत आधार को और पक्का करना चाहती है वहीं आप अपनी खोई हुई पकड़ वापस पाने की कोशिश में लगी है। इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी और कांग्रेस भी अपने लिए बेहतर संभावनाओं की तलाश कर रही हैं। तीस दिसंबर को आने वाले नतीजे दिल्ली की राजनीतिक दिशा को नया मोड़ दे सकते हैं।